पंचायतों के कारनामे
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पंचायतों के कारनामे |
नमस्कार मेरा नाम अशुतोष शुक्ला है।आज 19 जुलाई 2018 से ब्लॉग की दुनिया मे कदम रखने जा रहा हूँ।ओर मुझे पता नही ये ब्लॉग आगे जा कर कितना सफल हो पाता है,आप सभी से विनम्र अनुरोध है।आज से प्रतिदिन हमारे ब्लॉग प्रसारित होंगे तो उन्हें जरूर पढ़ें ।आपको मजा आयेगा। वो रात भर आहें भरने वाला मजा नही पढ़कर आनंद की अनुभूति लेने वाला मजा।हम अपना इंट्रोडक्शन किसी ओर दिन दे देंगे पोस्ट के साथ अल्ताफ राजा का गाना सुन लीजियेगा थोड़ा इंतजार का मजा लीजिये। तो ज्यादा तुचर-पुचर न करते हुए आज के शीर्षक "पंचायतों के कारनामे" श्री गणेश ,गणेश जी का नाम लेकर शुरू करते हैं।
"पंचायतों के कारनामे"
जैसा कि आप समझ ही गये होंगे कि कहानी पंचतंत्र की नही पंचायत की है,और तो और कारनामे भी ,कारनामे नही समझे कार+नामे ,मतलब पंचायत के दो प्राणी बन जाओ यानी कि एक सरपंच और दूसरा सचिव।और फिर ऐसे-ऐसे काम करो कि बड़ी बड़ी कार आपके नाम हो जाये इसलिए बोले थे 'कारनामे' । कारनामे के अलावा भी बहुत कुछ नाम हो जाता है,जैसे कि बंगलानामे ,जमींननामे और युवा हो तो बीवीनामे भी इतने सारे नामे हो जाते है कि एक एक पूरी चालीसा भी लिख दी जा सकती है।
अब आपको बताते है सरपंच कौन सा जीवाणु होता है,ये वह जंतु है जनता के वोट यानी पंचायत स्तर के चुनाव से जनता का प्रतिनिधि चुना जाता है,इसके लक्षण ये है कि ये चुनाव के समय आपका हितैसी बन जाता है,और आपके बच्चों की टट्टी तक साफ करने को बिना नाक बंद किये हुए ही साफ कर देगा।फिर जीतने के बाद सूत समेत वापस भी कर देगा ।और वादे भूलकर अपना घर बनवायेगा।ये नेता बनने पहली पायदान लांघ चुका होता है इसलिए इसको अगली पंचवर्षी में हार जाने का कोई गम नही होता।चिंता मत कीजिये अगले पोस्ट में और चर्चा करेंगे।अभी फिलहाल एक और प्राणी के बारे मे थोड़ी जान लेते है,और वो होता है ग्रामसचिव ये जनता द्वारा नही सरकारी नोकर होता है। सरकार का भी खाता है और जनता का भी,ओर निकलता मोदी जी के ग्राम शौचालयों में है।
जैसा कि आप समझ ही गये होंगे कि कहानी पंचतंत्र की नही पंचायत की है,और तो और कारनामे भी ,कारनामे नही समझे कार+नामे ,मतलब पंचायत के दो प्राणी बन जाओ यानी कि एक सरपंच और दूसरा सचिव।और फिर ऐसे-ऐसे काम करो कि बड़ी बड़ी कार आपके नाम हो जाये इसलिए बोले थे 'कारनामे' । कारनामे के अलावा भी बहुत कुछ नाम हो जाता है,जैसे कि बंगलानामे ,जमींननामे और युवा हो तो बीवीनामे भी इतने सारे नामे हो जाते है कि एक एक पूरी चालीसा भी लिख दी जा सकती है।
अब आपको बताते है सरपंच कौन सा जीवाणु होता है,ये वह जंतु है जनता के वोट यानी पंचायत स्तर के चुनाव से जनता का प्रतिनिधि चुना जाता है,इसके लक्षण ये है कि ये चुनाव के समय आपका हितैसी बन जाता है,और आपके बच्चों की टट्टी तक साफ करने को बिना नाक बंद किये हुए ही साफ कर देगा।फिर जीतने के बाद सूत समेत वापस भी कर देगा ।और वादे भूलकर अपना घर बनवायेगा।ये नेता बनने पहली पायदान लांघ चुका होता है इसलिए इसको अगली पंचवर्षी में हार जाने का कोई गम नही होता।चिंता मत कीजिये अगले पोस्ट में और चर्चा करेंगे।अभी फिलहाल एक और प्राणी के बारे मे थोड़ी जान लेते है,और वो होता है ग्रामसचिव ये जनता द्वारा नही सरकारी नोकर होता है। सरकार का भी खाता है और जनता का भी,ओर निकलता मोदी जी के ग्राम शौचालयों में है।
चलिए अभी रात के 3 बज रहे है ,शुभरात्रि सुप्रभात में तब्दील हो जाय इसलिए मुझे सोना आवश्यक है ,आपका क्या है आप तो कभी भी पढ़ लोगे पोस्ट ओर मै सोऊंगा नही फिर लिखूंगा कैसे पोस्ट अच्छा लगा तो कमेंट बॉक्स में बताने की कृपा करें।।और ये भी जान लीजिए अभी कारनामे पूरे नही हुए है तो वापस आइयेगा।
अच्छा अभी इतना समय देने के लिए धन्यवाद ।।
अच्छा अभी इतना समय देने के लिए धन्यवाद ।।

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